Sunday, 27 April 2014

पुण्यार्कवनस्पतितन्त्रम्-20

14- विदारीकन्द- विदारीकन्द एक जंगली लता है,जिसके कन्द(गांठदार मूल) का प्रयोग शक्तिवर्धक औषधी के   रुप में किया जाता है।इसकी पत्तियाँ पान की तरह होती हैं,और कंद- वाराही कंद की तरह(किन्तु रोंयेंदार नहीं)होते हैं।स्वाद में थोड़ा कड़वा होता है।यूँ तो किसी लता में बाँदा का होना असम्भव सा है,फिर भी जंगलों में भटककर अन्वेषण करने से इस लता का एक खास रुप मिल सकता है- जिसके लरियों में कहीं-कहीं उभरी हुयी गांठे (एक प्रकार की विकृति) मिल जायेगी- यही विदारीबाँदा है।इसे पूर्व वर्णित विधि से पूर्वाफाल्गुन नक्षत्र में घर लाकर स्थापन-पूजन करके पूजा-स्थल या तिजोरी में स्थायी रुप से स्थान देदें।धन-वृद्धि के लिए बड़ा ही सरल प्रयोग है यह।
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