Tuesday, 22 April 2014

पुण्यार्कवनस्पतितन्त्रम्- 7

                           ३.विभिन्न बाँदाओं के प्रयोग
 बाँदा प्रकरण में यहाँ कुछ खास बाँदाओं का वर्णन किया जा रहा है।कुछ ऐसे भी पौधे हैं,जिनके मूल-त्वक-काष्ठ आदि का भी तान्त्रिक उपयोग है।अतः उनकी चर्चा भी इसी प्रकरण में खण्ड विभाजन करके कर देना उचित लग रहा है।यथा- कुश,निर्गुण्डी.पीपल,वट,उदुम्बर इत्यादि।
(१)              वदरी-बाँदा- वदरी संस्कृत का शब्द है-इसका प्रचलित शब्द है- बेर।यह एक सुस्वादु फल है।इसमें बाँदा सौभाग्य से ही मिल सकता है।यदि कहीं दीख जाये, तो स्वाती नक्षत्र में विधिवत निमंत्रण देकर घर लाना चाहिए।विधि वही है जैसा कि पूर्व अध्याय में कहा गया है।एक दिन पहले संध्या समय अक्षत,फूल,जल, सुपारी,पैसा आदि लेकर वृक्ष के समीप जाकर.पूर्व या उत्तर मुख खड़े होकर

प्रार्थना करे- "हे दिव्य वनस्पति देव ! मैं अपने अभीष्ट सिद्धि हेतु कल प्रातः आकर आपको अपने घर ले चलूँगा।आप कृपया मेरे साथ अपने दिव्य विभूतियों सहित चलकर मेरा मनोरथ सिद्ध करें। " – कहकर अक्षत,फूल आदि वहीं वृक्ष मूल में छोड़ दें।अगले दिन प्रातः स्नान-पूजनादि से निवृत्त होकर कुछ औजार लेकर पास जायें।वृक्ष को प्रणाम कर, ऊपर चढ़कर, साथ लाये गए औजार से बाँदा को काट लें।अब साथ लाये गए लाल या पीले कपड़े में लपेटकर श्रद्धापूर्वक माथे से लगायें।घर आकर देव-प्रतिमा-स्थापन की संक्षिप्त विधि से स्थापन करके पंचोपचार/षोडशोपचार पूजन करें।इसके बाद ग्यारह माला शिव पंचाक्षर एवं ग्यारह माला देवी-नवार्ण मंत्रों का जप,हवन,तर्पण,मार्जन सम्पन्न करके कम से कम एक ब्राह्मण और एक दरिद्रनारायण को भोजन दक्षिणा सहित प्रदान करें।इस प्रकार आपका कार्य पूरा हो गया।अब, जब भी आवश्यकता हो,उस पूजित काष्ठ में से थोड़ा अंश काट कर लाल या पीले कपड़े या तांबे के ताबीज में भरकर प्रयोग कर सकते हैं।कल्याण भावना से (व्यापार नहीं)किसी को दे भी सकते हैं।इस बदरी-बाँदा का एक मात्र कार्य है- मनोनुकूलता प्रदान करना।यानि किसी से कुछ सहयोग लेना हो,कोई कार्य करवाना हो तो विधिवत धारण करके उस व्यक्ति के पास जाकर अपने इष्ट मंत्रों का मानसिक जप करते हुए प्रस्ताव रखना चाहिए।

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