Thursday, 4 September 2014

पुण्यार्कवास्तुमंजूषा-41

गतांश से आगे....
अध्याय १३.वास्तु मण्डल-(क) अन्तःवाह्य संरचना(कहां क्या?) भाग नौ


 ८.अन्नादि भंडार,पशुशाला,वाहन- इन तीनों के लिए वायव्य कोण का प्रावधान है।बहुमंजिले मकान में तो इसका विकल्प आसान है,किन्तु एक ही मंजिल रहने पर,और वास्तुमंडल का आकार छोटा होने पर समस्या होगी।ऐसी स्थिति में भंडार या वाहन को ही दूसरे विकल्प में ले जायेंगे ।गोशाला इस स्थान पर रहकर वास्तुमंडल को सर्वाधिक बल देगा,अतः इसे यहीं रखना उचित है। प्रयोग के तौर पर मैंने कई बार देखा है कि आर्थिक तंगी,विकास में अवरोध आदि कई समस्यायें सिर्फ गोशाला स्थापन से दूर हो जाती हैं।
   पहले समय में हर घर में गायें जरुर होती थी।पशुधन से ही किसी की औकाद आंकी जाती थी, जो आज महत्त्वहीन सा हो गया है।गाय का सीधा सम्बन्ध लक्ष्मी,विष्णु,गणेश,सूर्य,शिव,पार्वती,और ग्रहों में शुक्र से है।गोसेवा से सौभाग्य के अगनित द्वार खुलते हैं। बहुत सारे ग्रहों का नियन्त्रण गोसेवा  (गोग्रास) मात्र से हो जाता है।अतः गोशाला को उचित स्थान पर ही रखा जाय। इसका यह अर्थ भी नहीं कि गोशाला का कोई विकल्प नहीं है।पूरब,उत्तर में भी यथोचित स्थान दिया जा सकता है।प्रवेश द्वार पूरब से हो,तो ईशान क्षेत्र में गोस्थान रखें,ताकि निकास और प्रवेश में गाय का दर्शन-स्पर्शन हो।यात्रा काल में गोदर्शन और परिक्रमा का बहुत ही महत्त्व है। किन्तु जितना लाभ वायव्य से मिलेगा,उतना अन्यत्र नहीं।
    अब अन्न भंडारण की बात करें।किसान के यहाँ इसका महत् औचित्य है। अन्य लोगों के लिए जिन्हें पांच-दस किलो अनाज मात्र रखना है,अन्न भंडारण की क्या चिन्ता?इसे तो सीधे रसोईघर के वायव्य में,या समीप के स्टोर में रखा जा सकता है।दूसरा विकल्प- ईशान और पूरब के बीच का भंडारक्षेत्र, या तीसरा विकल्प दक्षिण का भंडार क्षेत्र भी हो सकता है।        इसे पूर्व के चित्रों और सारणियों से और अधिक स्पष्ट कर लेना चाहिए।
    अब बात आती है वाहन के लिए।पूरब या उत्तर मुख भवन हो,और मुख्य मंडल के अतिरिक्त रिक्त स्थान हो तो पोर्टिको वहीं बनालें।इससे भवन की सुन्दरता और सुविधा दोनों में वृद्धि होगी,किन्तु अतिरिक्त भाग में पोर्टिको निर्माण का कार्य दक्षिण-पश्चिम में कदापि न करें।इससे दक्षिण-पश्चिम प्रलम्ब,वा वास्तु-विस्तार दोष हावी हो जायेगा।वाहन के लिए पिछले प्रसंग में दिये गये सारणी,विवरण और चित्रांकों का सहयोग लेना चाहिए।
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क्रमशः...


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