Tuesday, 17 February 2015

पुण्यार्कवास्तुमंजूषा-103

गतांश से आगे...अध्याय अठारह...भाग अठारह

9.विजली और इलेक्ट्रोनिक शॉपः-तात्विक रुप से विचार करने पर इन सामानों की स्थिति(प्रयोग और स्थापन)में भेद के अनुसार तत्वभेद लक्षित होता है। उदाहरण के लिए विजली से चलने वाला हीटर,गीजर,मोटर,टी.वी.कम्प्यूटर, प्रिन्टर,वासिंगमशीन,मोबाइलफोन आदि समस्त उपकरणों में विभिन्न धातुओं (सोना भी)के साथ-साथ प्लास्टिक का प्रचुर प्रयोग हुआ करता है।किसी भी प्रकार के मिश्रण पर शनि की हिस्सेदारी परोक्ष और अनिवार्य रुप से हो ही जाती है,चाहे वह कुछ भी,किसी की भी वस्तु क्यों न हो- यह गौर करने वाली बात है- जैसे चावल पर चन्द्रमा का अधिकार है,चने की दाल वृहस्पति का क्षेत्र है,मसूर पर मंगल का,उड़द पर शनि-राहु का आधिपत्य है;किन्तु चावल के साथ सिर्फ चने की दाल मिलाकर प्रयोग(एकत्र पकाने का काम)जैसे ही करते हैं,शनि अनिवार्य रुप से वहाँ प्रविष्ट हो जाते हैं।इसी भांति किसी भी मिश्रण में शनि का हिस्सा होगा ही।राहु तो मौजूद हैं ही इलेक्ट्रोनिक में।यहाँ गौर तलब है कि जैसे ही इन्हें विजली(वैटरी भी विजली का ही रुप है)से सम्बन्ध स्थापित होता है- वैसे ही मंगल और अग्नि का साम्राज्य शुरु हो जाता है।वे दोनों हावी हो जाते हैं- शनि और राहु पर।ध्यातव्य है कि इनके कोप(अवांछित ऊर्जा-प्रवाह)को संतुलित करने का काम मंगल(सेनापति)ही कर सकते हैं।इन सारी बातों का ध्यान रखते हुए बिजली और इलेक्ट्रोनिक के सम्बन्ध में यहाँ कुछ वास्तु नियमों पर ध्यान दिलाया जा रहा है।यथा-
*       सामान्य नियमों से विपरीत- यानी पूरब-उत्तर को छोड़ कर अन्य दिशाओं में मुख वाली दुकानें अधिक उन्नत होंगी।नैऋत्यकोणमुखी भी रखी जा सकती है- ये द्वितीय श्रेणी में होगी।
*       अपेक्षाकृत भारी सामानों को दक्षिण-पश्चिम में ही रखना चाहिए,जैसा कि अन्य जगहों के लिए वास्तु नियम है।
*       प्रदर्शनमंजूषा(Showcase)में शीशे का अधिकाधिक उपयोग फायदेमन्द होगा।
*       ईशान और वायुकोण में विशेष सामग्री न रखे जायें।न रखने का कारण- उक्त दिशाओं का हल्कापन नहीं,प्रत्युत तात्विक विपर्यय है।यानी उद्देश्य है-जल और वायु से अग्नि को अलग रखना।
*       अग्नि-दक्षिण-नैऋत्य-पश्चिम क्रम से वस्तुओं को दुकान में सजायें।
*       विजली के तार में तांबे की प्रधानता होती है,लोहा,अल्युमीनियम,जस्ता, शीशा(लेड)भी होता है।इनमें मंगल की प्रधानता के साथ राहु-शनि का समावेश है।तदनुसार अग्निकोण से बाद के स्थानों (पश्चिम पर्यन्त) का चयन करना चाहिए।
*       चीनी मिट्टी के हीटर-प्लेट आदि अपेक्षाकृत वजनी हैं,राहु की प्रधानता है।अतः नैऋत्य में ही रखे जायें।
*       गल्ला(कैश-बॉक्स)या अन्य बातों के लिए अन्यान्य दुकानों वाला नियम ही लागू होता है।(द्रष्टव्य-इसी अध्याय का दुकान,शोरुम)।

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क्रमशः.....

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