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विकास का दौरा

  विकास का दौरा  जी हाँ, आपने विलकुल सही सुना है। पढ़ने वाले से न तो ‘ स्लिप ऑफ टंग ’   हुआ है और न लिखने वाले से ही ‘ स्लिप ऑफ पेन ’ । ऐसे में   भला सुनने वाले से ‘ स्लिप ऑफ साउण्ड ’ कैसे हो सकता है !   किन्तु वास्तव में जो कुछ हुआ है, उसे लिखने-बोलने में भी जरा संकोच हो रहा है। फिर भी कह ही देता हूँ। हो सके तो आप भी सुने , गुने और औरों को भी सुनायें। बेचारे सोढ़नदास जी ज्यादातर खुद को   ‘ हाउसअरेस्ट ’ यानी ‘ कोरेनटाइन ’ रखते हैं। पिछले दिनों कोरोना महामारी के समय लोगों को ‘ वर्क फ्रॉम होम ’ की लत लगायी गई या कहें लगानी पड़ी। बाद में हालात सामान्य होने पर भी लोगों की पसन्द बन गई घर बैठे काम निपटाने की। आप जानते ही हैं कि ज्यादातर सरकारी दफ्तरों में बाबुओं से लेकर पदाधिकारियों तक की मटरगस्ती और कामचोरी की लत तो स्वतन्त्रता की अहम पहचान है न ! सरकारी नौकरियों की मारामारी के पीछे मुख्य दो रहस्य छिपे हैं—कामचोरी और घूसखोरी। जबकि तीसरा रहस्य जग-ज़ाहिर है—आरक्षणकोटा का विशेषाधिकार। यानी ‘ नो टेन्शन फॉर क्वायलिटी एण्ड इन्टेलीजेन्सी ’ ।   ...

श्री ढकोशलानन्दजी की तन्त्र-साधना

बाबू अकड़ूनाथ

श्रीश्री फ्रॉडाचार्चजी