साधक का द्वन्द्व (आत्ममन्थन का नवनीत) छठा भाग - पृ.145 से 165तक “ मृत्यु और पुनर्जन्म का पूरा खेल इस ' मेमोरी कार्ड ' ( चित्त) की ही कलाकारी है। मृत्यु केवल शरीर की होती है , लेकिन यह ' डेटा बैंक ' सुरक्षित रहता है और यही डेटा नए शरीर की तलाश करता है। इसे सूक्ष्म शरीर की दृष्टि से इन तीन मुख्य बिन्दुओं में समझा जा सकता है — Ø ' स्मृति ' ही बीज है ( Desire and Memory) — जब मृत्यु घटित होती है , तो स्थूल शरीर ( Physical Body) मिट्टी में मिल जाता है , लेकिन सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर ( Causal Body) उस ' मेमोरी कार्ड ' को लेकर बाहर निकल जाते हैं। इस कार्ड में तुम्हारी अधूरी इच्छाएं ( Desires) और वासनाएं संचित होती हैं। जैसे एक बीज में पूरा वृक्ष छिपा होता है , वैसे ही इस मेमोरी कार्ड में तुम्हारे अगले जन्म का पूरा नक्शा छिपा होता है। जब तक इच्छाएं शेष हैं , यह कार्ड ' फॉर्मेट ' नहीं हो सकता और नया जन्म अनिवार्य हो जाता है। ...
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