Posted by kamlesh punyark
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साधक का द्वन्द्व (आत्ममन्थन का नवनीत) तीसरा भाग-- गतांश से आगे......(पृ.31 से 80तक) “ अब तुम पुनर्जन्म की यात्रा कैसे शुरू होती है , इसे समझो। आगे की बातों को हम बिलकुल आधुनिक शैली में—मोबाइल, कम्प्यूटर आदि के तकनीकी शब्दों का प्रयोग करते हुए तुम्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि किसी तरह की परेशानी / उलझन न हो। तुम्हें लगता होगा कि एक ही बात को बारबार अलग-अलग ढंग से क्यों कह रहा हूँ। दरअसल कुछ नई बात कहने के लिए कुछ पुरानी बात का सहारा लेना पड़ता है, ताकि विषयवस्तु का पुनर्स्मरण हो जाय। आगे की बातों को तीन चरणों में समझाते हैं— (क) सूक्ष्म शरीर का ' कोर ' (The Composition) -- इस अठारह तत्वों वाले सूक्ष्म शरीर में शामिल हैं— · बुद्धि (महत्) – निश्चय करने वाली शक्ति। · अहंकार – ' मैं ' का भाव। · मन – संकल्प-विकल्प करने वाला। · दस इन्द्रियाँ ( पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ + पाँच कर्मेन्द्रियाँ)। · ...
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